भारत के एक विश्वसनीय नेता और प्रख्यात व्यक्तित्व थे। वह 25 दिसंबर, 1924 को ग्वालियर, मध्यप्रदेश, भारत में जन्मे थे। उनके पिता श्री कृष्ण भिहारी वाजपेयी एक उत्तर प्रदेश के नेता थे। उन्होंने अपनी शिक्षा ग्वालियर में ही पूरी की और बाद में दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में मास्टर्स डिग्री हासिल की।
वाजपेयी जी ने राजनीतिक करियर की शुरुआत अपनी छात्र जीवन के दौरान की, जब वह नवजात जनसंख्या के लिए काम कर रहे थे। उन्होंने 1951 में भारतीय जनसंख्या नियंत्रण कानून को समर्थन देते हुए अपनी पहली भारतीय जनता पार्टी (BJP) की मीटिंग का आयोजन किया।
वाजपेयी ने भारतीय राजनीति में अपनी महत्त्वपूर्ण उपलब्धियों के साथ-साथ अपनी दिलचस्प व्यक्तित्व और आदर्शों के लिए भी जाने जाते हैं। उन्होंने भारत के राजनीतिक संस्थाओं में अपनी अहम भूमिका को निभाया और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेता के रूप में उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में तीन बार सेवा की पेशकश की। उन्होंने भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न आर्थिक सुधारों को लागू किया, जिनमें शामिल हैं सरकारी क्षेत्र के विनिवेश, निजी क्षेत्र के विकास, बैंकिंग और वित्तीय सुधार, आईटी क्षेत्र के विकास आदि।
वाजपेयी जी ने भारत के विदेश नीति को भी बदलाव दिया और अपनी सख्त देश के साथ संबंधों को अनुशंसित किया। उन्होंने भारत की जनता के लिए कई समाजवादी योजनाओं की शुरुआत की जिनमें से कुछ उनमें शामिल हैं - सर्वशिक्षा अभियान, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, नरेगा आदि।
अटल बिहारी वाजपेयी ने जीवन के अंतिम दिनों तक भारतीय राजनीति की महत्त्वपूर्ण शख्सियत के रूप में अपनी अहम भूमिका निभाई। उन्हें 16 अगस्त, 2018 को निधन हो गया। उन्होंने अपने जीवन में एक महान राजनीतिज्ञ, एक बहुमुखी विचारक, एक दृढ़ नेता और एक विश्वविद्यालय प्रोफेसर के रूप में अपनी यादगार छाप छोड़ी। उनका निधन एक बड़ी क्षति थी जो राजनीति, समाज और सांस्कृतिक क्षेत्रों में भारत और दुनिया भर में महसूस की गई।
उन्होंने अपने जीवन में अनेक सम्मान और पुरस्कार प्राप्त किए थे, जिनमें से कुछ निम्नलिखित हैं:
- पद्म विभूषण (1992)
- पद्म भूषण (1990)
- भारत रत्न (2015, मौत के बाद)
- बीसवीं सदी के महान भारतीय नेता का खिताब (1999)
- भारतीय समाज के उत्कृष्ट नायक का खिताब (1996)
- भारतीय राजनीति के सर्वश्रेष्ठ वकील का खिताब (2001)
- अमेरिकी संघीय गणतंत्र की सेवा के लिए महान विदेशी नागरिक का खिताब (2004)
उन्होंने अपनी जीवनी के दौरान बहुत से सामाजिक और कल्याणकारी कार्यक्रमों के संबंध में काम किया था और उनका नाम अभिजात शिक्षा, स्वच्छता अभियान, आधुनिक सुविधाओं और बुद्धिजीवियों के आध्यात्मिक विकास के समर्थन में सबसे अधत्याग और सेवा का परिचय दिया जाता है। उन्होंने अपनी जीवनी में कई उद्योगों की स्थापना की थी, जिनमें से अटल जलधारा योजना, ग्रामीण जीवनोदय योजना, स्वर्ण जयंती रोजगार योजना, आदि शामिल हैं।
उनकी स्मृति में, भारत सरकार ने एक राष्ट्रीय शोक दिवस का घोषणा किया था और उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। उनकी यादों को समर्पित अनेक स्मारकों की स्थापना की गई है।
अटल बिहारी वाजपेयी एक व्यक्तिगत और राजनीतिक संघर्ष के दौरान दृढ़ता और संकल्प का प्रतीक थे। उन्होंने भारतीय राजनीति को एक नई ऊंचाई दी थी जो संवैधानिक मूल्यों, लोकतंत्र और समाजवाद के प्रति पूर्ण समर्पण पर आधारित थी। उनका निधन एक अध्यात्मिक रिती से हुआ, जिससे वे आत्मीय शांति प्राप्त कर गए।
अटल बिहारी वाजपेयी जी के कार्यकाल में कई सफलताएं
उनके नेतृत्व में देश में कई महत्वपूर्ण कानूनों को लागू किया गया था। वह अपने जीवनकाल में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य कर चुके थे। यहाँ कुछ महत्वपूर्ण सफलताओं की एक संक्षिप्त सूची है -
1. गोल्डन क्वाड्रिलेटरल संधि - अटल बिहारी वाजपेयी जी के नेतृत्व में भारत ने अमेरिका, रूस, जापान जैसे चार विश्व के अर्थव्यवस्थाओं से संधि की थी। इससे भारत के अर्थव्यवस्था में बहुत वृद्धि हुई थी।
2. शक्तिपीठों का निर्माण - अटल जी ने देश भर में कई शक्तिपीठों का निर्माण करवाया। इससे देश के धार्मिक और पौराणिक अनुष्ठानों के लिए अधिक सुविधाएं मिलीं।
3. सर्वश्रेष्ठ विश्वविद्यालय अधिनियम - अटल जी द्वारा बनाए गए इस अधिनियम से देश में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में बहुत बदलाव हुए। इस अधिनियम के तहत देश में कुछ सबसे उच्च शिक्षा संस्थान बनाए गये
अटल बिहारी वाजपेई की असफलतायें
अटल बिहारी वाजपेई जी ने भारत के प्रधान मंत्री के रूप में 1998 से 2004 तक कार्य किया था। उनकी भारतीय राजनीति में कई सफलताएं हुईं, लेकिन कुछ मुश्किल स्थितियों में वह असफल रहे थे। नीचे कुछ ऐसी महत्वपूर्ण घटनाएं हैं जिनमें उन्होंने असफलता का सामना किया था:
1. करगिल युद्ध: 1999 में भारत-पाकिस्तान के बीच करगिल युद्ध शुरू हुआ था। इसमें भारतीय सेना के सैनिक ने शूरवीरता से लड़ते हुए अपनी जान दी। युद्ध में सफलता हासिल करने के बाद, अटल बिहारी वाजपेई जी को समाजवादी पार्टी व ममता बनर्जी के साथ मुख्यमंत्रियों के रूप में सहयोग नहीं मिला।
2. बाबरी मस्जिद विवाद: 1992 में बाबरी मस्जिद विवाद के दौरान अटल बिहारी वाजपेई जी भाजपा के नेता थे। वह राम मंदिर के निर्माण के लिए अपनी पार्टी के साथ काम कर रहे थे। लेकिन बाबरी मस्जिद के ध्वस्त होने के बाद उन्हें स्वयं को उपेक्षित करने वाली आलोचनाओं का सामना करना पड़ा।
3.अटल बिहारी वाजपेई की एक असफलता उनके सरकार के समय में कश्मीर मुद्दे पर हुई थी। उनकी सरकार ने कश्मीर में चुनाव करवाए थे, लेकिन चुनाव का विवाद हुआ और चुनाव को अवरुद्ध कर दिया गया। इसके बाद कश्मीर में स्थिति खराब हो गई और उस समय उनकी सरकार ने कश्मीर में आपातकाल लगा दिया था। इस समय कश्मीर में उत्पन्न हुए हालात बदहाल रहे और इस समस्या का उन्होंने समाधान नहीं किया।
4.दूसरी असफलता उनके सरकार के समय में भारत-चीन सीमा विवाद के समय हुई थी। 1962 में हुए सीमा विवाद में उनकी सरकार ने असफलता दर्ज की थी। उन्होंने चीन के साथ बढ़ती तनाव और युद्ध के दौरान भारत को असफलता का सामना करना पड़ा।
तीसरी असफलता उनके सरकार के समय में समाज कल्याण योजनाओं की असफलता थी। उनकी सरकार ने कुछ समाज कल्याण योजनाओं को शुरू किया था, जैसे अंत्योदय योजना और प्रधान मंत्री ग्रामीण सड़क योजना।
उनके द्वारा लिखी गई किताबें
अटल बिहारी वाजपेयी ने कई पुस्तकें लिखीं जो उनके विचारों और अनुभवों को समर्पित हैं। कुछ उनकी पुस्तकों के नाम निम्नलिखित हैं:
1. "कुछ ख्वाब"
2. "अटल जी की अमर कहानियाँ"
3. "सजग रहें, अकेले नहीं चलेंगे"
4. "दस्तक"
5. "भारत माता की जय"
6. "शक्ति से शांति"
इन पुस्तकों के अलावा भी अटल बिहारी वाजपेयी ने कई अन्य पुस्तकें लिखीं हैं जो उनके जीवन के विभिन्न पहलुओं पर आधारित हैं।
अटल बिहारी वाजपेयी की पुस्तकों के बारे में अधिक जानकारी और खरीदने के लिए निम्नलिखित लिंक देखें:
1. https://www.amazon.in/Atal-Bihari-Vajpayee/e/B003U8EEUY
2. https://www.flipkart.com/author/atal-bihari-vajpayee
3. https://www.goodreads.com/author/show/203996.Atal_Bihari_Vajpayee
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